एनोमिक आत्महत्या क्या है?

0

ऐसे परिवार जहां बच्चों को किशोर अवस्था में आने से पहले ही अपने निर्णय लेने की इजाज़त दे दी जाती है, वहाँ असभ्यता, भ्रम और अराजकता होनी निश्चित है। माता-पिता घर में नियमितता पाने के लिए और अपने बच्चों को अच्छे आचार-विचार सिखाने के लिए घर में  नियम और विनियम निर्धारित करते हैं जो उन्हें समाज में अच्छा इंसान बनाने में मदद करता है। माता-पिता के द्वारा बच्चों के व्यवहार पर किसी भी तरह के नियंत्रण की अनुपस्थिति का परिणाम होता है कि बच्चे एक भ्रमित व्यवहार रखते हैं जो बिना अंजाम और नतीजे के होता है।

जिस तरह एक माता-पिता बच्चों को नियंत्रण में रखने के लिए एक मापदंड निर्धारित करते हैं, वैसे ही समाज भी सामाजिक रूप से स्वीकृत व्यवहार और गतिविधियों को नियंत्रित करने में मदद करने के लिए नियम और विनियम या नीति निर्धारित करता है जिसके परिणामस्वरूप सामाजिक अस्थिरता और अराजकता हो सकती है। इस प्रकार समाज के सदस्यों के जीवन को जीने के नियम हैं।

आत्महत्या को समझने और समझाने का इतिहास फ्रांसीसी समाजशास्त्री डेविड एमिल डर्कहेम तक जाता है।

हमने पिछले लेखों में अन्य प्रकार की आत्महत्या के बारे में बात की है लेकिन एक संक्षिप्त संक्षेप करते हैं अपने नए पाठकों को बताने के लिए कि हम किसकी बात कर रहे हैं।

एमिल डर्कहेम ने चार प्रकार की आत्महत्या का वर्णन किया और उन दो कारकों की पहचान की जो उन्हें प्रभावित करते हैं;  इनके गुणांक सामाजिक संबंध और सामाजिक नियम हैं। आत्महत्या के प्रभावशाली कारकों (सामाजिक नियमों और सामाजिक एकीकरण) दोनों में दोहरे पात्र हैं जिनमें उन्होंने “शब्द और विपरीत” तरीके में समाज में आत्महत्या पर अपना प्रभाव दिखाया है। यानि की, “एक अतिरिक्त” और “कमी।

समाज में समाजीकरण की कमी लोगों को अकेलापन महसूस करा सकती है जिससे बचने के लिए अहंकारी आत्महत्या के रूप में मौत का सहारा ले सकते हैं।

अगर आत्महत्या। इसके विपरीत सामाजिक एकीकरण की कमी के विपरीत, सामाजिक एकीकरण की अति आत्म विनाश कर सकती है जिसे औल्टृइस्टिक आत्महत्या कहते हैं।

इसी प्रकार, सख्त सामाजिक नियमों या सख्त कानूनों और नीतियों की उपस्थिति से लाचारी और निष्फलता हो सकती है जो आगे कारण बनती है फेटलिस्टिक आत्महत्या का। यह हमे छोड़ता है एनोमिक आत्महत्या के साथ।

एनोमिक आत्महत्या आत्मघाती रूपों में से एक है जिसे एमिल डर्कहेम द्वारा चर्चा की गई है जो फेटलिस्टिक आत्महत्या के विपरीत है। एनोमिक आत्महत्या को समझने के लिए, हमें पहले पता होना चाहिए कि एनोमी क्या है।

एनोमी क्या है?

एनोमी एक समाजशास्त्रीय सिद्धांत है जिसे वर्ष 1893 में सबसे पहले एमिल डर्कहेम द्वारा वर्णित किया गया था जिसे कानूनहीनता और मूल्यों और सामाजिक मापदंडों की अनुपस्थिति के रूप में समझा गया है। समाज में कानून और व्यवस्था का बिखरना जिससे संभावित अलगाव और लोगों और उनकी संस्कृति के बीच सामाजिक बंधन टूट जाता है।

हालांकि, एमिल डर्कहैम ने इसे समूह या व्यक्तिगत मानकों और विनियमन के सामाजिक मानकों (स्थाई रूप से कानूनों या नियमों की अनुपस्थिति नहीं) के बीच एक विसंगति के रूप में समझाया और निराशा और मोह-भंग के साथ एनोमिक आत्महत्या को जोड़ने के लिए आगे बढ़े।

एनोमिक आत्महत्या तब हो सकती है जब कोई व्यक्ति अवास्तविक लक्ष्यों को स्थापित करता है जो उसको अधिक महत्वाकांक्षी दर्शाते हैं और फिर उन लक्ष्यों को पाने में विफल हो जाता है क्योंकि लक्ष्य प्राप्त करने के लिए तैनात माध्यमों और सामाजिक परिस्थितियों द्वारा परिभाषित क्या साध्य है, इनके बीच असहमति होती है। प्राकृतिक और मानव निर्मित दोनों कारक लक्ष्य प्राप्त करने और सामाजिक नियमों के माध्यमों के बीच असंतुलन का कारण बन सकते हैं। जिन लोगों ने अपने आस पास प्राकृतिक, या एक घोर आर्थिक मंदी का अनुभव किया है वे लोग एनोमिक आत्महत्या का विचार कर सकते हैं।

अध्ययनों ने वर्ष 1928 और 1932 के बीच अम्रीका के इतिहास में बेरोजगारी दर और एनोमिक आत्महत्या के बीच एक सहसंबंध दिखाया है, जब बेरोजगारी का दर लगभग 24 प्रतिशत तक गया था और इसके बाद आत्महत्या के दर में वृद्धि हुई थी। साथ ही, वर्ष 2000 में जब बेरोजगारी  का दर लगभग 4 प्रतिशत था तब कम आत्महत्या रिपोर्ट दर्ज की गई थी।

जब लोगों को एहसास होता है कि पर्यावरण में अचानक परिवर्तन की वजह से उनका जीवन कभी समान नहीं होगा, तो डर निश्चित था। प्राकृतिक आपदाओं के पीड़ितों को अक्सर संपत्ति और पर्यावरण परिवर्तन के नुकसान से बाहर आने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है और इसीलिए वे खुद को किसी भी मार्गदर्शन से वंचित भ्रम की स्थिति में पाते हैं कि परिवर्तनों को कैसे अनुकूलित किया जाए या संभवतः जीवन की गतिविधियों को कब दोबारा शुरू किया जाए।

कोबे में 1995 के भूकंप के बाद, जापानी सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग ने आत्महत्या की बढ़ती दरों की सूचना दी।

एक व्यक्ति की मानसिक तस्वीर का अनुमान लगाएँ जो एक नाव के मलबे का एकमात्र जीवित व्यक्ति बना है और अकेले द्वीप में फंस गया जहां के बारे में उसे कोई ज्ञान नहीं है। वह द्वीप के भीतर संभावित मानव बस्तियों की खोज करने की कोशिश करता है ताकि वह घर जाने के साथ मदद पा सके लेकिन जल्द ही एहसास हुआ कि वह द्वीप पर एकमात्र व्यक्ति है, लेकिन एक और द्वीप देखा गया है, हालांकि स्पष्ट रूप से वह दूर स्थित है। वह तब भ्रमित और निराश हो जाता है क्योंकि उसे यह ज्ञात होता है कि बाहरी दुनिया से किसी भी तरह की मदद प्राप्त करना असंभव हो सकता है अगर वह किसी संकेत के माध्यम से बाहर निकलने की कोशिश नहीं करता है जिसे आसानी से गुज़रती हुई नौकाओं या विमानों से देखा जा सके।

चूंकि हमारा यह आदमी पहले कभी ऐसी स्थिति में नहीं रहा है, इसलिए उसे धुएँ का संकेत भेजने के लिए छड़ें और पत्थरों से आग लगने की संभावना जानने के बावजूद द्वीप पर उपलब्ध संसाधनों का उपयोग करके संकेत बनाना मुश्किल लगता है। वह इन संकेत उपकरणों में हेरफेर करने के तरीके को समझने में असमर्थता के कारण परेशान हो जाता है क्योंकि उसके पास कदम उठाने के लिए कोई दिशानिर्देश नहीं है। उसे यह भी यकीन नहीं था कि क्या वह मदद पाने के लिए पर्याप्त कोशिश कर रहा था या अगर वह सही संकेत भेजने जा रहा था, भले ही उसने यह पता लगाया कि कैसे करना है, तो उसने खुद को डूबकर अपनी जान देदी।

उसकी परिस्थिति से उसे क्या उम्मीद करनी चाहिए, उसके बारे में उनकी अनिश्चितता और, मदद पाने की इच्छा और द्वीप पर जो उपलब्ध था, इनके बीच बेमेल उसकी एनोमिक आत्महत्या के लिए ज़िम्मेदार हुई।

एनोमिक आत्महत्या के बारे में सोच रहे इंसान का जीवन इस भ्रम से भरा होता है,कि  पर्याप्त करना कैसे परिभाषित है , खुद पर्याप्त बनना या पर्याप्त होना।

आत्महत्या एक भयानक व्यवहार है और बड़ी चिंता का मुद्दा बनी हुई है। सोशल मीडिया पर निराशाजनक संदेशों की एक श्रृंखला पोस्ट करने के बाद आत्महत्या करने वाले लोगों की हाल ही में रिपोर्टों के साथ, लोगों की जिंदगी में और हमारे आस-पास संभावित आत्महत्या जोखिमों के संकेतों को देखना हमारी सामूहिक ज़िम्मेदारी है।