गैमोरा ने एचआईवी रोगियों के वायरल भार को 99% से घटाया

0

नवंबर का महीना कुछ अच्छी खबरों से शुरू हो रहा है क्योंकि चिकित्सा शोधकर्ताओं के एक गुट को लगभग निश्चित है कि आखिरकार वे गैमोरा नामक दवा के पहला मानव नैदानिक ​​परीक्षण द्वारा दिए गए उत्कृष्ट परिणाम के बाद एचआईवी का इलाज ढूँढने के लिए सही रास्ते पर हैं।

यह बताया गया है कि दवा गैमोरा की जांच के पहले चरण में, इलाज के पहले एक महीने में यह एचआईवी को 99 प्रतिशत तक खतम कर देती है।

ज़ाइओन मेडिकल नामक एक इज़राइली बायोटेक कंपनी ने जयरूसलेम के हिब्रू विश्वविद्यालय के साथ मिलकर परीक्षणों पर काम किया है।

परीक्षण के जबरदस्त नतीजे से पता चला है कि गैमोरा दवा ने एचआईवी संक्रमित कोशिकाओं को खत्म करके और स्वस्थ कोशिकाओं को बिना नुकसान पहुंचाए मानव करता के वायरल लोड में बहुत ही उल्लेखनीय कटौती की है।

हालांकि यह एक बहुत ही छोटी शुरुआत है और अन्वेषण का पहला चरण है, परीक्षण के नतीजे ने 35 साल पहले उभरे एचआईवी वायरस के लिए संभावित इलाज के लिए बहुत उम्मीद जगाई है।

ज़ीज़ाइओन मेडिकल में विकास के प्रमुख, डॉ एस्मिरा नाफ्ताली, ने कहा था कि यह पहले क्लिनिकी नतीजे गुट की अपेक्षा और एचआईवी रोग के इलाज के वादे को पूरा करने से बहुत ज्यादा अच्छे थे।

2018 के जुलाई और अगस्त के महीनों में, युगांडा में रोनाल्ड बाटा मेमोरियल अस्पताल में कुल 9 एचआईवी रोगियों को यादृच्छिक रूप से चुना गया था और चार से पांच हफ्ते तक गैमोरा की अलग अलग खुराक प्राप्त करने के लिए नियुक्त किया गया था। डॉक्टर नाफ्ताली के मुताबिक, ज्यादातर मरीजों ने केवल चार हफ्तों में वायरल लोड में आधारित स्तर से लग भग 90 प्रतिशत तक की महत्वपूर्ण गिरावट दिखाई है।

गैमोरा परीक्षण के दूसरे चरण के दौरान, जो पहले हफ्ते के दो हफ्ते बाद आयोजित किया गया था, रोगियों को और तीस से सैंतीस दिन तक गैमोरा दवा दी गई थी जिसमें कुछ रेट्रोवायरल दवा भी थी।

दूसरे परीक्षण के नतीजे ने चार हफ्तों बाद रोगियों के संयोजन उपचार के साथ 99 प्रतिशत तक वायरल लोड में कमी दिखाई।

अध्ययन में भाग लेने वाले मरीजों ने दुष्प्रभावों का कोई संकेत नहीं दिखाया और गैमोरा दवा गैर-विषाक्त है।

अध्ययन की एक और सकारात्मक बात यह है कि दोनों, पहले और दूसरे अध्ययन समूह के रोगियों ने कुल दस सप्ताह के दौरान टी सेल की गणना में उल्लेखनीय वृद्धि दिखाई। टी सेल गिनती में यह वृद्धि प्रतिरक्षा प्रणाली के कार्य में एक प्रमुख भूमिका निभाती है।

डॉ नाफ्ताली ने बताया कि उनके द्वारा किया गया परीक्षण सीमित प्रकृति का था, वे दूसरे चरण में और अधिक विस्तारित अवधि में प्रतिभागियों की एक बड़ी संख्या के साथ गैमोरा की दक्षता का सबूत दिखाने के लिए बहुत उत्साहित हैं।

एचआईवी के इलाज के लिए इस दवा पर शोध एक दशक पहले जेरूसलम के हिब्रू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर अब्राहम लोएटर ने शुरू किया था। 2010 में प्रकाशित एड्स रिसर्च और थेरेपी पर एक लेख ने पूर्व-नैदानिक ​​परीक्षण के नतीजों का खुलासा किया था, और मानव परीक्षण का वर्तमान परिणाम पूर्व-नैदानिक ​​परीक्षण परिणाम का दर्पण प्रतिबिंब प्रतीत होता है। विकास के पिछले चरण के दौरान, ज़ाइओन मेडिकल ने पहले न्यूयॉर्क के प्रसिद्ध माउंट सिनाई अस्पताल के साथ मिलकर काम किया था। मानव परीक्षण के दूसरा चरण को आने वाले महीनो में तेज़ी से शुरू किए जाने की संभावना है और साथ ही अध्ययन विषयों की तीस होगी और गैमोरा के लिए खुराक की अवधि अधिकतम तीन महीनों तक बढ़ाई जाएगी।  हालांकि, ऑस्ट्रेलिया में एचआईवी संगठन ने पहले से ही उत्तेजित होने के खिलाफ चेतावनी दी है क्योंकि सकारात्मक परिणाम को व्यापक रूप से दोहराया जा सकता है या नहीं, यह जानने के लिए और अधिक अध्ययन की ज़रूरत है।

सार्वजनिक शिक्षा संस्था, एचआईवी इलाज के अनुसार जो एचआईवी के साथ रहने वाले लोगों की नेशनल एसोसिएशन द्वारा चलाया जाता है, अब वायरस के इलाज के बारे में शोध घोषणाएं आती हैं और फिर अक्सर उपचार खोजने की दिशा में उठाए गए कदमों के लिए आती है। समूह ने बताया कि इन घोषणाओं के पीछे की कहानी हमेशा ऐसी नहीं होती जैसी हमेशा मुख्य समाचारों में दिखाई जाती है क्योंकि आम तौर पर यह ज्यादा पेचीदा होती हैं और विज्ञान कोई ऐसी चीज़ नहीं है जो सही दिशा में एक बड़ा कदम उठाने के नतीजे से एकदम तरक्की करले। गैमोरा अनुसंधान का नतीजा भले ही पूरी तरह से प्रशंसनीय और उत्साहजनक है, दवाइयों को व्यापक रूप से उत्पादित करने में तथा आम जनता तक पहुँचाने में सालों लग सकते हैं।

दवाई को व्यापक आबादी के उपयोग के लिए अंतत: प्रमाणित करने से पहले समय के साथ इसका और निरीक्षण और परीक्षण किया जाएगा। साढ़े तीन दशक पहले एचआईवी एड्स के उभरने के बाद से, यह हाल के इतिहास में सबसे आधुनिक और सबसे विनाशकारी महामारी में से एक रहा है। उपचार के रेट्रोवायरल विधि में हाल ही में महत्वपूर्ण प्रगति ने लोगों को एचआईवी के साथ दोनों स्वस्थ और लंबे जीवन जीने में सक्षम बना दिया है क्योंकि रेट्रोवायरल दवाइयाँ एचआईवी को शरीर में फैलने से रोकती हैं। रेट्रोवायरल उपचार के इस्तेमाल से, कई एचआईवी मरीजों में लगभग अनभिज्ञेय लगभग अप्रचलित वायरल भार देखे गए हैं। रेट्रोवायरल दवाओं ने, पीरईपी नामक दवा की सफलता के साथ-साथ, वायरस के प्रसार को अवरुद्ध करने के लिए काम किया है, जिससे ऑस्ट्रेलिया में नए संक्रमण की दर में उल्लेखनीय गिरावट आई है।

तब भी, दुनिया में एचआईवी से संक्रमित लगभग 360 लाख लोग रह रहे हैं, और इस बात ने अनुसन्धानों को कई दशकों से समय और पैसा दोनों समर्पित करने के लिए प्रेरित किया है। एचआईवी रोग के फैलाव के पश्चात, लगभग 350 लाख लोग अपना जीवन गंवा चुके हैं। गैमोरा ना केवल एचआईवी को रोकने के लिए योजनबद्ध है, बल्कि इसे संभावित तौर पर कुछ प्रकार के कैंसर के इलाज के रूप में भी लिया जा सकता है क्योंकि शोधकरता उम्मीद कर रहे हैं की यह कैंसर कोशिकाओं पर भी लक्ष्य साधेगा और उन्हें खत्म करेगा और इसी दौरान स्वस्थ कोशिकाओं को सकुशल रखेगा।